भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन का मामला
वर्तमान सरकार संसद के शीत कालीन सत्र में भारतीय नागरिकता संशोधन विधेयक ला सकती है। चर्चा है कि इस अधिनियम में संशोधन करके सरकार ऐसे प्रावधान करना चाहती है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के हिंदू सिख जैन बौद्ध लोगों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने में आसानी हो, लेकिन मुस्लिम लोगों को इसका लाभ प्राप्त नहीं होगा। विपक्ष को इसी भेदभाव के कारण ही आपत्ति है।अब देखिए आगे क्या होता है। हालाकि इस संशोधन का कारण यह है कि इन देशों में हिन्दू सिख जैन बौद्ध बहुत ही ज्यादा प्रताड़ित हैं अतः इन देशों के जो लोग भारत की नागरिकता चाहते हैं, भारत उनका स्वागत करना चाहता है। लेकिन यदि बात मुस्लिम जनसंख्या की कीजाए तो उनके साथ ऐसी कोई प्राब्लम नहीं है और बांग्लादेश से आए मुस्लिम शरणार्थियों के कारण पहले से ही एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। भारत और बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पूर्णतया कृत्रिम है। अतः बांग्लादेश से लोग चोरी छुपे भारत में आते ही रहते हैं। बांग्लादेश से सटे भारतीय राज्य पश्चिमी बंगाल असम मेघालय त्रिपुरा तथा मिजोरम में बांग्लादेश से आये हुए शरणार्थियों की संख्या कहीं-कहीं इतनी अधिक हो गयी है कि यहाँ मूल भारतीयों की स्थिति अल्पसंख्यक की हो गई है। भारत के 25 विधानसभा क्षेत्रों में स्थिति ऐसी है कि यहाँ कौन प्रत्यासी चुनाव में विजयी होगा, यह बांग्लादेश से आये हुए आदेश पर निर्भर करता है। इस समस्या के कारण कभी-कभी सांप्रदायिक दंगे भी हो जाते हैं जैसा कि अगस्त 2012 में असम में हुआ था जिसके प्रभाव से बेंगलुरु हैदराबाद मुम्बई तथा इलाहाबाद में भी दंगे हुए। अतः विपक्ष को इस बात को समझना होगा और अपनी तुष्टिकरण की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में निर्णय लेना होगा।
वर्तमान सरकार संसद के शीत कालीन सत्र में भारतीय नागरिकता संशोधन विधेयक ला सकती है। चर्चा है कि इस अधिनियम में संशोधन करके सरकार ऐसे प्रावधान करना चाहती है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के हिंदू सिख जैन बौद्ध लोगों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने में आसानी हो, लेकिन मुस्लिम लोगों को इसका लाभ प्राप्त नहीं होगा। विपक्ष को इसी भेदभाव के कारण ही आपत्ति है।अब देखिए आगे क्या होता है। हालाकि इस संशोधन का कारण यह है कि इन देशों में हिन्दू सिख जैन बौद्ध बहुत ही ज्यादा प्रताड़ित हैं अतः इन देशों के जो लोग भारत की नागरिकता चाहते हैं, भारत उनका स्वागत करना चाहता है। लेकिन यदि बात मुस्लिम जनसंख्या की कीजाए तो उनके साथ ऐसी कोई प्राब्लम नहीं है और बांग्लादेश से आए मुस्लिम शरणार्थियों के कारण पहले से ही एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। भारत और बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पूर्णतया कृत्रिम है। अतः बांग्लादेश से लोग चोरी छुपे भारत में आते ही रहते हैं। बांग्लादेश से सटे भारतीय राज्य पश्चिमी बंगाल असम मेघालय त्रिपुरा तथा मिजोरम में बांग्लादेश से आये हुए शरणार्थियों की संख्या कहीं-कहीं इतनी अधिक हो गयी है कि यहाँ मूल भारतीयों की स्थिति अल्पसंख्यक की हो गई है। भारत के 25 विधानसभा क्षेत्रों में स्थिति ऐसी है कि यहाँ कौन प्रत्यासी चुनाव में विजयी होगा, यह बांग्लादेश से आये हुए आदेश पर निर्भर करता है। इस समस्या के कारण कभी-कभी सांप्रदायिक दंगे भी हो जाते हैं जैसा कि अगस्त 2012 में असम में हुआ था जिसके प्रभाव से बेंगलुरु हैदराबाद मुम्बई तथा इलाहाबाद में भी दंगे हुए। अतः विपक्ष को इस बात को समझना होगा और अपनी तुष्टिकरण की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में निर्णय लेना होगा।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें