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संपादकीय लेख : भयादोहन की राजनीति

इस टॉपिक पर आधारित मेरा एक संपादकीय लेख प्रकाशित हो चुका है। 

भय पैदा करके शक्ति को संतुलित करके आने वाले समय में युद्धों को रोकने की रणनीति को भयादोहन की स्ट्रैटजी कहते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शीत युद्ध काल में तनाव होते हुए भी दोनों महाशक्तियों के बीच युद्ध नहीं हुआ। इसका सबसे प्रमुख कारण भयादोहन की स्ट्रैटजी ही थी। चूंकि दोनों महाशक्तियां परमाणु शक्ति संपन्न थी अतः यदि युद्ध होता तो सम्पूर्ण मानवता का विनाश निश्चित था। इसीलिए तनाव को कम करने का प्रयास किया गया जिससे धीरे धीरे ऐसा माहौल बना की शीत युद्ध समाप्त हो गया। आज भी भयादोहन की स्ट्रैटजी ही विश्व शांति में सबसे ज्यादा सहायक की भूमिका में है। पाकिस्तान भारत पर लगातार परमाणु युद्ध का भय दिखा कर भारत को साधने की कोशिश कर रहा है। चीन भी डोकलाम विवाद के समय पीछे हटा, उसके पीछे भी भयादोहन की स्ट्रैटजी काम कर रही थी। चीन भारत को 1962 का हवाला देकर धमका जरूर रहा था लेकिन वह यह जानता है कि आज का भारत 1962 का भारत नहीं है। भारत भी परमाणु शक्ति संपन्न है, यदि युद्ध होता तो चीन को भी व्यापक हानि होती अतः पीछे लौटने में ही अपनी भलाई समझा।


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