चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है। चीन भारत में लगभग 64 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता है जबकि भारत केवल 14 अरब डॉलर का निर्यात चीन में करता है। उपरोक्त आंकड़े के प्रकाश में यह कहा जा सकता है कि चीन और भारत के व्यापारिक संबंध चीन के पक्ष में है अर्थात भारत से चीन को अधिक फायदा हो रहा है। अतः चीन चाह कर भी भारत को एक सीमा से ज्यादा नाराज नहीं कर सकता और ऐसे समय तो बिल्कुल नहीं जब अमेरिका से उसके आर्थिक संबंध अच्छे दौर में न हो। इसीलिए जब चीन भारत से संबंध बिगड़ते देखता है तो डैमेज कंट्रोल करने के लिए बैकफुट पर चला जाता है। डोकलाम विवाद के समय भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला और वर्तमान में कश्मीर प्रकरण में भी।
लेकिन सामरिक मामलों में चीन भारत को अपना प्रतिद्वंदी मानता है। हिन्द महासागर में चीन अपनी मोतियों की माला नीति के तहत भारत की घेरेबंदी कर रहा है। चूंकि चीन की इस नीति में पाकिस्तान साझीदार है व पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह चीन अपने सामरिक हितों के अनुरूप विकसित कर रहा है तथा हिन्द महासागर से सीधे तौर पर कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए ग्वादर बंदरगाह को चीन से जोड़ने के लिए आर्थिक व सामरिक गलियारा बना रहा है और पाकिस्तान इसमें चीन की पूरी मदद कर रहा है, इसलिए वह पाकिस्तान को भी नाराज नहीं कर सकता। अतः लगातार अपने बयान बदल कर अपने दोनों ही हितों को साधने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन सामरिक मामलों में चीन भारत को अपना प्रतिद्वंदी मानता है। हिन्द महासागर में चीन अपनी मोतियों की माला नीति के तहत भारत की घेरेबंदी कर रहा है। चूंकि चीन की इस नीति में पाकिस्तान साझीदार है व पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह चीन अपने सामरिक हितों के अनुरूप विकसित कर रहा है तथा हिन्द महासागर से सीधे तौर पर कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए ग्वादर बंदरगाह को चीन से जोड़ने के लिए आर्थिक व सामरिक गलियारा बना रहा है और पाकिस्तान इसमें चीन की पूरी मदद कर रहा है, इसलिए वह पाकिस्तान को भी नाराज नहीं कर सकता। अतः लगातार अपने बयान बदल कर अपने दोनों ही हितों को साधने की कोशिश कर रहा है।
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